यूरोप की पूर्व-ऐतिहासिक गुफा चित्रकारी~Pre- Historic Cave Painting of Europe

यूरोप की पूर्व-ऐतिहासिक गुफा चित्रकारी~Pre- Historic Cave Painting of Europe

पूर्वपाषाणकालीन चित्रों में स्पेन के अल्टामिरा तथा फ्रांस के लास्को व ल एयजी स्थानों के गुफा चित्र सबसे प्रसिद्ध हैं। इस प्रकार के कई गुफा चित्र पश्चिमी यूरोप से लेकर दक्षिणी अफ्रीका तक कई स्थानों में पाये गये हैं व उनमें कभी इतनी समानता दृष्टिगोचर होती है कि कुछ विद्वानों का मत है कि इन भिन्न प्रदेशों का कभी एक दूसरे से सम्पर्क रहा होगा। यूरोप के गुफाचित्र अधिकतर स्पेन के पूर्वी व उत्तरी प्रदेशों में व फ्रांस के दक्षिणी पश्चिमी प्रदेश में सीमित हैं।
रशियन साइबेरिया के याकुत्स व उझबेकिस्तान प्रदेशों में भी पूर्व पाषाणकालीन गुफाचित्र मिले हैं। भारत व चीन में भी इस काल खण्ड के गुफा चित्र पाये गये हैं।
ये कलाकृतियाँ ऐसी भी दिखायी नहीं देती कि किसी अनभिज्ञ द्वारा फुर्सत के समय में मनोरंजन के हेतु बनायी गयी हों, क्योंकि इनमें जानवरों तथा मानवों की आकृतियों में सादृश्य एवं सजीवता का आभास है तथा यह भी स्पष्ट है कि ये निरीक्षण पूर्वक रचना कौशल के साथ तथा किसी विशेष उद्देश्य को लेकर बनायी गयी हैं।
हिमाच्छादन को चार प्रमुख कालखण्डों में विभाजित किया गया है व नवमानव की पश्चिमी यूरोप में उपस्थिति कालखण्ड में यानी 30,000 ई. पूर्व हुई। इस समय मानव, डार्विन के उत्क्रान्तिवाद के सिद्धान्त के अनुसार उस श्रेणी की अन्तिम अवस्था में था जिसका आरम्भ कई लाख वर्ष पूर्व वानर अवस्था में हो गया था।
जिन लोगों ने ये चित्र बनाये थे उनके बारे में विशेष ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त नहीं है। अतः पाषाणकालीन चित्रकला को यूरोपीय कला की परम्परा में अन्तर्भूत नहीं किया जा सकता। किन्तु इन चित्रों के अध्ययन से मानवजाति की कलात्मक प्रवृत्ति पर काफी प्रकाश डाला जा सकता है।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि पाषाणकालीन चित्रकारों को रेखांकन रंगांकन के मूल तत्त्वों का ज्ञान था। कुछ चित्र पूर्णरूप से रेखाओं द्वारा तो कुछ चित्र पूर्णतया हल्के व गहरे रंगों की छटाओं के प्रयोग से बनाये गए हैं।
कहीं रेखा व रंगों का सम्मिश्र प्रयोग है। भिन्न अंकन पद्धतियों पर उन कलाकारों ने जो प्रभुत्व का परिचय दिया है वह आश्चर्य जनक है।
सांड के ऊबड़-खाबड़ व विशाल शरीर की उभारदार भव्य मुद्रा एवं हरिण के चिकने व लोचपूर्ण शरीर का गतित्व बहुत ही कुशलता से व्यक्त किये हैं। इस दृष्टि से उनकी तुलना जापानी व चीनी कलाकारों के प्राणी चित्रों से की जा सकती है।

यूरोप के गुफाचित्र 


अल्टामिरा के चित्रों की विशेषताएँ:
  • 1879 में स्पेन में अल्टामिरा गुफा की खोज हुई। उस समय साधन के रूप में केवल वनस्पतियों की डंडिया, पत्थरों के औजार व रंगीन पत्थरों को पीस कर बनाये हुए रंग ही उपलब्ध थे व उनको ही इस्तेमाल करके कलाकृतियाँ बनायी गयी थी।
  • अल्तामिरा की गुफा स्पेन में स्थित है। यह ऊपरी पुरातन गुफा है जिसमें पुरुषों के हाथों और जंगली जानवरों के चित्र बनाए गए हैं। ये शहर सांतिया डेल मार्च कान्ताब्रिया स्पेन में स्थित है।
  • चूना पत्थर की ये गुफाएंये गुफा 300 मीटर लंबी है। इस गुफा की छत 6/7 फुट ऊंची है, जिससे छत के चित्र देखने के लिए झुकना या लेटना पड़ता है। इसका मुख्य मार्ग दो से छह मीटर तक की ऊंचाई तक का है।
  • भित्ति के साथ गुफा की छत पर भी चित्रण मिलता है, जो अपेक्षाकृत अधिक कलात्मक है ।
  • इसको बनाने के लिए चारकोल और हेमटिट का इस्तेमाल किया गया है। इसमें घोड़ों और बक्रिओं के चित्र बने हुए हैं।
  • ये पर्याप्त मात्रा में नैसर्गिक हैं व गुफाओं की ऊबड़-खाबड़ छतों पर चित्रित होने से उनमें कुछ स्वाभाविक ठोसपन आ गया है। चित्रण के लिए मिट्टी के रंगों का प्रयोग किया है, जिनमें भूरा, कत्थई, पीला (पीली मिट्टी के रंग जैसा) व लाल रंग है।
  • ये जानवरों की चर्बी में मिलाकर लगाये गये हैं तथा काजल व कोयले का भी प्रयोग है। समकालीन मेलानेशियन जातियों की प्रथा से तुलना कर हम अनुमान लगा सकते हैं कि पूर्व पाषाणकाल में भी प्रत्येक टोली का कोई निपुण कलाकार होता होगा जिसको उसके इस चित्रकारी के दैवी सामर्थ्य के कारण धर्मपंडित के समान स्थान दिया जाता होगा।
  • अनेक रंगों में बनाये इन चित्रों में घनत्व के अतिरिक्त जानवरों की हलचल सजीव प्रतीत होती हैं।

अल्टामिरा गुफा

उत्तरी स्पेन की कुछ गुफाएँ जमीन में काफी गहराई तक पहुँची हुई हैं जिसके पीछे कोई रक्षा सम्बन्धी या धार्मिक रहस्य का उद्देश्य कारण होगा। ऐसे प्रमाण भी मिलते हैं। जिससे यह अनुमान लगा सकते हैं कि ये गुफाएँ मानव के निवास स्थान न होकर मंत्र- तंत्र युक्त धार्मिक विधियों के लिए आरक्षित थीं।
इनमें से ला पासिएगा की गुफा का प्रवेश द्वार तो एक चट्टान के बीच में कठिन स्थान पर है जहाँ से सीधे काफी नीचे तक अनेक मोड़ लिये हुए मार्ग से अन्दर जाना पड़ता है। यहाँ के चित्र स्पष्ट रूप से विशेष मंत्र विद्या के हेतु बनाये हैं।
फ्रांस के दक्षिण-पश्चिम प्रदेश में प्राप्त गुफाएँ अधिक प्राचीन हैं। ये भूमि के काफी गहराई में हैं व इनमें नैसर्गिक प्रकाश का प्रायः अभाव है। तो भी गुफा के अलंकरण में पीला, लाल, भूरा, सिन्दूरी व काला जैसे भिन्न रंगों का प्रयोग है। इसके अतिरिक्त कई भिन्न जाति के जानवरों के चित्र हैं, जितने स्पेन की गुफाओं में देखने को नहीं मिलते।
1940 में फ्रांस में प्राप्त लास्को की पूर्वपाषाणकालीन गुफा का आविष्कार अल्टामिरा की गुफा की तरह अचानक हुआ जब लड़के अपने खोए हुए कुत्ते की तलाश में जमीन के गड्ढे में घुसकर उसको खोदने का प्रयास कर रहे थे।
यहाँ के चित्रों में उन्मत्त बैल, हृष्ट- पुष्ट घोड़े, हमले के पैंतरे में खड़ा जंगली सांड, बारह सींगा आदि आकृतियाँ हैं। स्पेन के गुफा चित्रों के समान इन चित्रों में गतित्व पर विशेष जोर नहीं दिया गया है एवं चित्र के सम्पूर्ण संयोजन से व्यक्तिगत आकृति की ओर अधिक ध्यान दिया है।

लस्को गुफा के चित्रों की विशेषताएँ:
  • लास्को की गुफा यूरोप के दक्षिणी-पश्चिमी फ्रांस में स्थित है।
  • दक्षिणी-पश्चिमी फ्रांस की अन्य प्रमुख गुफाओं में फान्त द गाम, ला-कम्बारेली, ले-त्राय-फेयर्स तथा दरगास की गुफाएँ आदि है।
  • लास्को की गुफा की खोज 1940 ई0 में अचानक हुई। कुछ बच्चे अपने कुत्तों की तलाश में जमीन के अन्दर गड़ढे में घुसकर उसे देखने का प्रयास कर रहे थे कि इसी क्रम में उन्हें यहाँ प्रागैतिहासिक चित्र दिखाई दिए।
  • यहाँ पर 33 गज लम्बी एंव 11 गज चैड़ी चित्र वीथिका (कलाकक्ष) प्राप्त हुई है। इस विशाल कक्ष को वृषभों वाला कक्ष कहा गया है।
  • लास्को गुफा का विख्यात चित्र तैरते हुए हिरणों का है।
  • चूना पत्थर से निर्मित लास्को की गुफा बेनेर घाटी में अवस्थित है।
  • लास्को गुफा के चित्र काफी सुरक्षित अवस्था में है। यहाँ से प्राप्त मध्यवर्ती कक्ष में जिसे बैलों का वृहत् कक्ष कहा गया है, में चार काले बैल कतार में चित्रित है, जिसमें सबसे बड़ा बैल 18 फीट लम्बा बनाया गया है।
  • इन चार वृषभों के बीच में हिरण, अश्व तथा गाय आदि का चित्रण छोटे आकार में लाल रंग से किया गया है।
  • लास्को गुफा में एक विशाल गाय का चित्र है, जिसमें कत्थई और भूरे रंगों का प्रयोग हुआ है।
  • यहाँ के चित्रों में एक सींग वाले अश्व का चित्रण विचित्र पशु के रूप में किया गया है।
  • यहाँ से उत्कीर्ण चित्र भी मिले है, जिनमें कुलाचे मारते हुए हिरण व तैरते हुए हिरन का चित्र महत्वपूर्ण है। इनमें से केवल हिरणों का सिर एंव गर्दन भर दिखाई देता है।
  • लास्कों गुफा के चित्रों में मानव आकृतियों का चित्रण भी मिलता है, लेकिन बहुत कम। पशु आकृतियों में तांत्रिक शक्तियों का आभास दिखाई देता है।
  • लास्को गुफा में उँगली और तूलिका द्वारा चित्रण करने के अतिरिक्त बारीक चूर्ण का भुक्का उड़ाकर गीली दीवार पर रंग लगाने की विधि भी प्राप्त होती है।

लस्को गुफा, फ्रांस




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