मिट्टी~Clay
मिट्टी~Clay
मिट्टी दुनिया का सारा मल, कूड़ा या हर तरह की गन्दगी को अपने अंदर समा लेती है और खुद अपने आप में शुद्ध हो जाती है। ज़मीन के अंदर जो कुछ भी दबा दिया जाता है वह मिट्टी बन जाता है।पृथ्वी के ऊपरी सतह पर मोटे, मध्यम और बारीक कार्बनिक तथा अकार्बनिक मिश्रित कणों को 'मृदा' मिट्टी कहते हैं। मृदा की ऊपरी सतह पर से मिट्टी हटाने पर प्राय:जो परत प्राप्त होती है उसे चट्टान [शैल]कहते है। कभी कभी थोड़ी गहराई पर ही चट्टान मिल जाती है।नदियों के किनारे तथा पानी के बहाव से लाई गई मिट्टी जिसको 'कछार मिट्टी'(जलोढ़ मिट्टी) कहते हैं, खोदने पर चट्टान नहीं मिलती। वहाँ नीचे के स्तर में जल का स्रोत मिलता है। सभी मिट्टियों की उत्पत्ति चट्टान से हुई है। जहाँ प्रकृति ने मिट्टी में अधिक हेर-फेर नहीं किया और जलवायु का प्रभाव अधिक नहीं पड़ा, वहाँ यह संभव है कि हम नीचे की चट्टानों से ऊपर की मिट्टी का संबंध क्रमबद्ध रूप से स्थापित कर सकें।खेतों की मिट्टी में चट्टानों के खनिजों के साथ-साथ, पेड़ पौधों के सड़ने से, कार्बनिक पदार्थ भी पाए जाते हैं।मिट्टी चाहे कोई सी भी किस्म की क्यों न हो लेकिन होनी साफ-सुथरी जगह की चाहिए जैसे जहाँ सूरज की रोशनी पहुँचती हो तथा ज़मीन से दो या ढाई फुट से निकाली हुई हो। हर मिट्टी को धूप में सुखाकर और छानकर इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है। दीमक के टीले की मिट्टी बहुत ही ज़्यादा गुणकारी होती है। नहाने और सिर को धोने के लिए मुलतानी मिट्टी बड़ी लाभकारी होती है।भारत में सबसे ज्यादा पाई जाने वाली मिट्टी में जलोढ़ मिट्टी, लाल मिट्टी, काली मिट्टी, लैटेराइट मिट्टी प्रमुख हैं।मूर्ति बनाने के लिए काली मिट्टी और चिकनी मिट्टी की जरूरत पड़ती है।
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